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ईमानदारी का इनाम ! बाप बेटा की अदभुत कहानी

इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया!! क्लास मैं हमेशा से अव्वल आता रहा है! पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो… मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया !

दुनिया एक सराय है,

एक राज्य में एक राजा रहता था जो बहुत घमंडी था । उसके घमंड के चलते आस पास के राज्य के राजाओं से भी उसके संबंध अच्छे नहीं थे । उसके घमंड की वजह से सारे राज्य के लोग उसकी बुराई करते थे । एक बार उस गाँव से एक साधु महात्मा गुजर रहे थे उन्होंने ने भी राजा के बारे में सुना और राजा को सबक सिखाने की सोची।

संगति का असर

कहा जाता है कि अच्छी संगति और अच्छे विचार इंसान की प्रगति का द्वार खोल देते हैं ।  संगति इंसान के जीवन में बहुत बड़ा महत्व रखती है , अगर आप बुरी संगति में हों तो आप कितने भी बुद्धिमान क्यों ना हों आप कभी भी जीवन में आगे नहीं बढ़ पाएंगे और वहीँ अगर आप अच्छे लोगों की संगति में हैं तो आपको बड़ी बड़ी समस्याएँ भी छोटी लगने लगेंगी । ऐसी ही एक सच्ची घटना आपके सामने प्रस्तुत है , 

बूढ़ा पिता

किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी । बूढ़ा बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार गया था, चलते समय लड़खड़ाता था लाठी की जरुरत पड़ने लगी, चेहरा झुर्रियों से भर चूका था बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहा था।

आखिरी प्रयास

किसी दूर गाँव में एक पुजारी रहते थे जो हमेशा धर्म कर्म के कामों में लगे रहते थे । एक दिन किसी काम से गांव के बाहर जा रहे थे तो अचानक उनकी नज़र एक बड़े से पत्थर पे पड़ी । तभी उनके मन में विचार आया कितना विशाल पत्थर है क्यूँ ना इस पत्थर से भगवान की एक मूर्ति बनाई जाये । यही सोचकर पुजारी ने वो पत्थर उठवा लिया ।

सच्चे संघर्ष की कहानी

कहा जाता है कि अगर इंसान में संघर्ष और कठिन मेहनत करने की क्षमता हो तो दुनिया में ऐसा कोई मुकाम नहीं है जिसे हासिल ना किया जा सके । कवि रामधारी सिंह दिनकर ने सही ही कहा है कि “मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है”। ये कथन कानपुर के रहने वाले अभिषेक पे बिल्कुल सही बैठता है । सोना तपकर ही कुंदन बनता है और इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने अपना जीवन अभावों में गुजारा है वही लोग आगे चलकर सफलता को हासिल करते हैं ।

सोमवार की सुबह

स्वामी और उसके दोस्त का प्रथम अंश सोमवार की सुबह थी। स्वामीनाथन की आंखे खोलने की इच्छा नहीं हो रही थी। सोमवार उसे कैलेंडर का सबसे मनहूस दिन लगता था। शनिवार और रविवार की

प्यारे पिताजी

कहानी का प्रथम अंश सब्जी बनाने से पहले झींगी के दो टुकड़े कर छुरी की नोक से उसका जरा सा गुदा निकाल बिपुल की मां ने मुंह में डालकर चख लिया। कहीं झींगी कड़वी तो नहीं। झींगी और तोरी की कुछ प्रजातियां इतनी कड़वी होती हैं कि अगर सब्जी में पड़ जायें तो पूरी सब्जी कड़वी हो जाती है।

बैंगन के गुण

बबलू बहुत देर से अपनी बहन से झगड़ रहा था। बहन उससे बड़ी थी और काफी देर से सब्र कर रही थी।

ओमू ने खुशियां खरीदीं

हरादून लौटते हुए काका ने ओमू को दस रूपये थमाए। काका दफ्तर के किसी काम से ओमू के गांव आए थे

गरम जामुन

बहुत समय पहले की बात है, सुंदरवन में श्वेतू नामक एक बूढ़ा खरगोश रहता था।

चालाकी का फल

एक थी बुढ़िया, बेहद बूढ़ी पूरे नब्बे साल की।

जादू की छड़ी

एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी।

धूर्त भेड़िया

ब्रह्मारण्य नामक एक बन था। उसमें कर्पूरतिलक नाम का एक बलशाली हाथी रहता था।

भगवान के भरोसे

सूर्य अस्त हो चला था।

सोनिया का संकोच

एक लड़की थी- सोनिया। वह बहुत कम बोलती थी,

आये थे हरिभजन कों, औटन लगे कपास

कबीर युवावस्वथा में ही ईश्वर की ओर झुक गए थे। न चाहते हुए भी कबीर को पारिवारिक बंधन में बंधना पड़ा था ।